LR 21 : बिना स्ट्रक्चरल स्टेबिलिटी की जांच कराए टावर का काम कराना कितना जोखिम भरा है

यह संदेश उन लोगों को सावधान करने की लिए  है जो बिना स्ट्रक्चरल स्टबिलिटी टेस्टिंग कराए ही किसी ऐसे अधूरे टावर  मे दुबारा काम शुरू करने जा रहे हैं जिसका काम पिछले  3-4 सालों  या  उससे अधिक समय से रुका पड़ा है ।

मैं “सावधान”  शब्द का प्रयोग  कर रहा हूं क्योंकि मैंने कोलकाता में विवेकानंद फ्लाईओवर का मामला देखा है, जिसमें निर्माणाधीन फ्लाईओवर अचानक नीचे गिर जाता है और गिरते हुए भारी भरकम ढांचे के भार और आघात से नीचे सड़क पर चल रहे कई लोग दबकर,कुचल कर मर  जाते है .



यह भयावह हादसा 31-3-2016 को सुबह 10 बजे हुआ जब मैं कोलकाता मे ही रहा करता था । खबर फैली कि  जहां पर ढांचा गिरा है वहाँ कुछ दिन पहले ही सिमेन्ट कंक्रीट की कास्टिंग हुई थी। सभी यही मान  रहे थे की ठेकेदार ने सीमेंट कम डाला होगा और ढलाई , फार्मवर्क हटाते ही गिर गई होगी ।  उत्सुकतावश जब मैं घटनास्थल पर गया तो दुर्घटना का एक अजीब कारण दिखा । दुर्घटना का कारण चल रहे काम मे कम सिमेन्ट डाला जाना नहीं था ।  
  

लगभग 7 साल पहले शुरू किया गया काम कुछ विवादों  के कारण रुक गया। उस समय तक नीचे का लोहे का ढांचा तैयार हो  चुका था जिसके ऊपर कंक्रीट की स्लैब की ढलाई ( कास्टिंग) होनी थी । स्लैब का काम 5 साल के बाद शुरू हुआ। इन 5 सालों के दौरान लोहे की संरचना बिना कान्क्रीट के कवर के बारिश धूप और हवा – धुआँ झेलती रही और उसके नट – बोल्टों मे जंग लग गई . 

जब 5 साल बाद नया कंक्रीट स्लैब डाला गया, तो नए डाले गए कंक्रीट के भार के कारण  नट-बोल्ट फेल हो गए और लोहे की संरचना जमीन पर आ गिरी ।

 

पिछले दिनों जब मैं   इमारतों और संरचनाओं की संरचनात्मक स्थिरता ( structural stability )पर एक प्रशिक्षण  में CBRI रुड़की के फैकल्टी का व्याख्यान सुन रहा था तो फिर से उस दुर्घटना की याद आ गई । जब प्रश्न सत्र आया तो मैंने उनसे पूछा, सर, ग्रेटर नोएडा में, कई रुकी हुई परियोजनाओं में निर्माण कार्य फिर से शुरू किया जा रहा है। उन्हें यह सुनिश्चित करने के लिए किस प्रकार का परीक्षण करना चाहिए कि संरचना मे,6 से 10 वर्षों तक बारिश, धूप और पर्यावरण की मार झेलकर भी पर्याप्त शक्ति बची है ,उसके ऊपर और निर्माण का वजन डाला जा सकता है और उसके बाद जब लोग रहेंगे तो वो उनका वजन भी सहेगा ?

फैकल्टी ने मुझे बताया , मैंने एक बहुत अच्छा सवाल पूछा है और यह कई लोगों के जीवन को बचा सकता है। उन्होंने बताया कि इस तरह की पर्यावरण का सामना करती इमारतों और  संरचनाओं में मुख्य समस्या स्टील की छड़ का क्षरण है जिसे आरसीसी अवयवों  जैसे बीम, कॉलम और स्लैब के अंदर डली होती है । चूंकि प्लास्टर का आवरण मौजूद नहीं रहता  है, इसलिए बारिश का पानी और वातावरण का  कार्बन डाइऑक्साइड मिलकर  कार्बोनिक एसिड H2CO3 बनाता है जो अम्लीय वातावरण प्रदान करता है जो स्टील के क्षय का कारण बनता है। उन्होंने कहा की अगर जंग लगने से RCC मे डली  लोहे की छड़ का  1 प्रतिशत हिस्सा भी क्षरित  होकर निकल जाता है  , तो RCC की भार वहन क्षमता 50% तक कम हो जाती  है।

हम में से अधिकांश लोग यह जानकर आश्चर्यचकित होंगे कि स्टील रॉड के 1% क्षरण से आरसीसी में 50% ताकत का नुकसान होता है। मुझे भी आश्चर्य हुआ और पूछा, क्यों? उन्होंने बताया कि छड़ की बाहरी परत और उसके चारों ओर के कंक्रीट  के बीच एक मजबूत बंधन होता है । यदि स्टील की छड़ की बाहरी परत को जंग लग जाता है, तो यह छील जाएगा और स्टील और कंक्रीट के बीच रिक्त स्थान पैदा होने से वह बंधन ढीला पड़  जाएगा  एक बार पकड़ खो जाने के बाद, एक आरसीसी में स्टील का होना या नहीं होना एक जैसा है  क्योंकि कंक्रीट से स्टील तक तन्यता तनाव का स्थानांतरण ( tensile stress का transfer)केवल इस बंधन  के माध्यम से होता है।

इस स्पष्टीकरण के बाद, CBRI फकल्टी  ने विभिन्न प्रकार के गैर-विनाशकारी परीक्षण, कोर कटर परीक्षण और लोड परीक्षण का सुझाव दिया ।

अब मैं  आपको ये भी बता दूँ की  एनबीसीसी ये सभी परीक्षण उन सभी भवनों में कर रही है जो कोर्ट उन्हें द्वारा उन्हें दिए गए हैं। लेकिन हमारे टॉवर-वाइज़ वाले बंधुगण  इस महत्वपूर्ण पहलू के बारे में बिल्कुल निश्चिंत  हैं।

क्या  वास्तव मे ला रेसीडेंसीया मे भी ऐसी कोई समस्या  है या मैं बेवजह  तिल को ताड़ बना रहा हूँ ?

इस बात का जबाब आपको निर्माण स्थल पर जाकर मिल जाएगा ।  जाइए और देखिए कि पिछले 6 -10 वर्षों से वर्षा जल, जमा हुआ काला  पानी , और लीकेज का लगातार बहता पानी हमारी संरचना को लगातार नुकसान पहुँचा रहा है। यदि आप साइट पर जाने की स्थिति में नहीं हैं, तो टॉवर 30 की इन तस्वीरों पर बस एक नज़र डालें .




आप निश्चित रूप से सहमत होंगे कि इस तरह के हालात मे  स्टील परत का कम से कम 1% जंग में खो गया होगा। यदि ऐसा है, तो ऐसा बीम या कालम या स्लैब  जहां लोहे मे इस तरह की जंग लग गई है, उसे तोड़कर दुबारा बनाने  की आवश्यकता है। मुझे सबसे ज्यादा चिंता बालकनी स्लैब की है। ला रेजिडेंशिया का मुख्य आकर्षण बालकनी स्लैब हैं जहां बिल्डर बता रहा था, 3 तरफ से हवा चलेगी। यदि आपको याद नहीं है, तो ब्रोशर देखें।

 

बालकनी के स्लैब को अगर 50% ताकत के साथ ही इस्तेमाल करेंगे तो क्या हो सकता है , सोचिए । ।  जिस दिन 3 या अधिक लोग इस बालकनी पर खड़े होंगे, यह ढह जाएगा। ब्रोशर के चित्र को देखिए .यह अपने 2 मंजिल नीचे वाली बालकनी पर पूरे वेग से गिरकर उसे भी तोड़ेगा और ये एक  श्रृंखला बनाकर जमीन तक जाएगी ।

यह खरीदारों के जीवन के लिए एक गंभीर खतरा है। जो लोग पुराने निर्माण की ताकत की जांच किए बिना नए निर्माण कर रहे हैं वे अपने स्वयं के जीवन और अन्य निर्दोष व्यक्तियों के जीवन के साथ खेल रहे हैं।

इसलिए प्रिय टॉवर वाइज़  बायर्स , सावधान । यदि कोई दुर्घटना हुई है तो आपको जवाबदेह ठहराया जा सकता है क्योंकि आप इस निर्णय का हिस्सा हैं। बिल्डर पहले से ही कई मुकदमे झेल  रहा है और उसके पास सभी मामलों से लड़ने के लिए पर्याप्त पैसा है। आपका क्या होगा  ?

यदि आप अपने जीवन और करियर को बचाना चाहते हैं, तो कृपया बिल्डर की इच्छा के अनुसार टावरों का निर्माण करने और सभी सुरक्षा पहलुओं की अनदेखी करने की लालसा छोड़ दें। कृपया हमारे एसोसिएशन का हिस्सा बने और  सर्वोच्च न्यायालय से न्याय और समाधान मांगें । जब हमारे फ्लैट्स एनबीसीसी द्वारा कोर्ट रिसीवर की निगरानी में बनाए जाएंगे, तो ऐसे तकनीकी बिंदुओं को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। 

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